लंढौर मेले में उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत दिखी, पहाडी व्यंजनों का स्वाद विदेशियों को भी भाया

मसूरी। जब विदेश्यिों ने पहाड़ी खाना मंडवे की रोटी के साथ खाया तो तो बोला वॉव। छावनी परिषद के तत्वाधान में ग्रीन लीफ के सहयोग से लंढौर मेले का आयोजन किया गया जिसमें उत्तराख्ंांड की सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया गया मेले का उदघाटन छावनी परिषद के सीईओ अभिषेक राठौर व छावनी उपाध्यक्ष महेशचंद ने किया। इस मौके पर उन्होंने मेले का निरीक्षण किया व पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद भी लिया। चार दुकान में आयोजित लंढौर मेले में बड़ी संख्या में देशी विदेशी पर्यटकों ने भाग लिया। मेले में कई संस्थाओं ने अपने स्टाल लगाये थे जिसमें उत्तराखंड के आर्गेनिक उत्पादों, उनसे बनी वस्तुओ, हस्तशिल्प, व पहाड़ी खाना परोसा गया। इस मोके पर छावनी परिषद मसूरी के सीईओ अभिषेक राठौर ने कहा कि मेला लगाने के पीछे उददेश्य यह है कि यहां आने वाले देशी विदेशी पर्यटकों को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू करवाना है जिसमें यहंा का खानपान, हस्तशिल्प आर्ग्रेनिक उत्पाद मुख्य हैं ताकि इसका लाभ स्थानीय लोगों को मिल सके। उन्होंने कहाकि यह मेला तीन दिन तक चलेगा। इस मौके पर छावनी उपाध्यक्ष महेशचंद ने कहा कि पहले छावनी क्षेत्र उपेक्षित रहता था यहां कोई सांस्कृतिक व अन्य गतिविधियां नहीं होती थी जिसे देख विगत सात सालों से मेला लगाया जा रहा है जो हर साल अपना आकार बढा रहा है। उत्तराखंड का भोजन परोस रहे पंकज अग्रवाल ने कहा कि इस मेले में उन्होंने टिहरी का राजशाही भोजन देवलगढ़ कुजीन परोसा है जिसमें पासाई व सर्द अचारी सब्जी के साथ मंडुवे की रोटी, पल्लर, दाल के पकोड़े मीठा भात आदि परोसा है जिसे देशी पर्यटकों के साथ विदेशी पर्यटक पंसद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि जो खाना राजा खाते थे वह आम जनता को परोसा जाय इसी के तहत इसे कांसे की थाली में परोसा जा रहा है। हिल इश्क कैफे की संचालिका आशु जैन ने बताया कि उन्होंने पिडालू के कबाब,  स्टिंंिगग कबाब, पतुंगे कुलथ दाल कबाब, आलू जखिंया परांठा, कुलथ परांठा, छोली रोटी,गुच्छी मशरूम बिरयानी, भांग की चटनी सहित भंगजीर, मडवा आदि से बनी चाकलेट व कोदे के आटे की कॉफी, झंगोरे की खीर, आदि परोस रहे हैं। मेंले में विदेशी पर्यटक क्रिस्टोफर ने कहा कि उन्होंने पहली बार गढवाल का खाना खाया जिसका स्वाद अलग ही था उन्हें इसका स्वाद बहुत पंसद आया। दिल्ली से आयी रूबीना ने कहा कि उन्होंने भी पहली बार यहां पहाड़ के विभिन्न खाद्य पदार्थो को आनंद लिया। बताया कि उन्होंने कई प्रकार के भोजन किए लेकिन उत्तराखंड के खाने का अपना मजा है। मेले में पहाड़ी किसानी, जैविक कृषक समूह, उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद, टंटुक, सहित अनेक संस्थाओं ने स्टाल लगाये थे जिसमें पहाडी कपडों से लेकर हस्तशिल्प, आभूषण, जैविक उत्पाद आदि लगाये गये थे। वहीं मेले में गढवाली लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुति प्रोमिला पंवार नेगी की टीम ने दी। इस मौके पर छावनी सभासद रमेश कन्नौजिया, पुष्पा पडियार, नरेंद्र पडियार, चंद्रकला सयानाा, बादल प्रकाश, छावनी परिषद कार्यालयक्षीक्षक सिकंदर नौटियाल सहित बड़ी संख्या में देशी विदेशी पर्यटक मौजूद रहे।